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UPSC Exam: एक हजार पदों के लिए 13 हजार ने दी परीक्षा, जानें कैसे थे पेपर्स

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UPSC Exams: सिविल सेवा की मुख्‍य परीक्षाएं अभी-अभी सम्‍पन्‍न हुई है, इनमें एक हजार पदों के लिए लगभग तेरह हजार परीक्षार्थियों को बैठने के लिए चयनित किया गया था. अब इनमें से लगभग ढाई हजार युवाओं का चयन इन्‍टरव्‍यू के लिए होगा. अंत में एक हजार नौजवानों को सिविल सर्वेन्‍ट बनने का सौभाग्‍य मिल सकेगा.

इस बार जो परीक्षा ली गई है, इसे एक बहुत ही संतुलित, व्‍यवस्थित और वैज्ञानिक सोच वाली परीक्षा कहा जा सकता है. विशेषकर सामान्‍य ज्ञान के जो चार पेपर्स आये, जिनकी भूमिका परीक्षा के कुल मार्क्‍स में पचास प्रतिशत की होती है, वे बहुत ही बेहतरीन तरीके के रहे. प्रश्‍नों में पाठ्यक्रम, विषय की मूलभूत समझ और सम-सामयिक घटनाओं के बीच बहुत अच्‍छा तालमेल देखने को मिला.

नहीं करनी पड़ी ज्‍यादा माथा-पच्‍ची 

सामान्‍यतया सभी पेपर में लगभग चालीस प्रतिशत प्रश्‍न ऐसे थे, जो सीधे-सीधे स्थिर प्रवृत्ति के थे. प्रश्‍नों में भी जटिलताएं देखने को नहीं मिलीं. ये इस तरह के प्रश्‍न थे, जिनके उत्तर देने में परीक्षार्थियों को ज्‍यादा माथा-पच्‍ची करने की जरूरत नहीं पड़ी, लेकिन हां, इतना जरूर था कि उत्तर ऐसे भी नहीं थे कि किताबों या नोट्स से रट लेने पर काम हो जायेगा. अपने पढ़े हुए को पूछे गये प्रश्‍न के सांचे में ढ़ालकर रचनात्‍मकता का प्रमाण तो देना ही पड़ेगा.

कैसा था प्रश्‍न-पत्र ?
शेष में से चालीस-पचास प्रतिशत प्रश्‍न ऐसे थे, जो करेंट अफेयर्स से जुड़े हुए थे. इसमें संविधान पर आधारित प्रश्‍न-पत्र – 2 और मूलत: अर्थव्‍यवस्‍था पर आधारित प्रश्‍न-पत्र-3 को लिया जा सकता है. प्रश्‍न-पत्र-1 में भी समाज शास्त्र का हिस्‍सा इसी प्रकार की प्रवृत्ति का था. ये प्रश्‍न सीधे-सीधे करेंट अफेयर्स पर आधारित थे इसलिए इनके उत्तर कहीं भी बने बनाये देखने में नहीं आते. यहाँ परीक्षार्थी को उस माली का रोल निभाना पड़ता है, जो बगीचे के अलग-अलग पौधों से फूल इकठ्ठे करके उन्‍हें एक धागे में पिरोकर माला का रूप देता है. सुनने में यह बात आसान-सी लगती है, लेकिन ऐसा है नहीं. ऐसे प्रश्‍नों के उत्तर की सबसे बड़ी चुनौती यह होती है कि पिछले लगभग डेढ़ साल से जुड़ी महत्‍वपूर्ण घटनायें एक समय विषेश में याद आयें और फिर आप उनका इस्‍तेमाल कर सकें. परीक्षा के दौरान समय का जितना अधिक दबाव होता है, उसे देखते हुए यह कर पाना कोई आसान बात नहीं है.और सच यही है कि मुख्‍य परीक्षा का सारा दारोमदार ऐसे ही प्रश्‍नों पर होगा कि परीक्षार्थी उन्‍हें किस प्रकार हल कर पाते हैं।

सबसे मजेदार प्रश्‍न-पत्र
नैतिकता पर आधारित चौथा प्रश्‍न-पत्र सबसे अधिक मजेदार और मौलिक रहा. यदि हम एक-दो प्रश्‍नों को छोड़ दें, तो सारे प्रश्‍न ऐसे थे, जिनके उत्तर परीक्षार्थियों को अपने दिमाग में ही बनाने थे. इससे भी बड़ी बात यह कि ऐसे उत्तर समाज और नौकरशाही की व्‍यावहारिक समझ की मांग कर रहे थे. इसका मतलब यह हुआ कि यह पेपर शुद्धत: पढ़ाकू किस्‍म के विद्यर्थियों की पकड़ से बाहर का पेपर था. इसकी केस स्‍टडी वाले भाग में जो केस दिए गए हैं, वे समय को देखते हुए कुछ ज्‍यादा ही लम्‍बे हैं. इसके कारण परीक्षार्थियों के लिए उन घटनाओं और तथ्‍यों को याद रख पाना बहुत मुश्किल हो गया, जिनके आधार पर पूछे गये प्रश्‍नों के उत्तर देने थे. इस भाग को थोड़ा अव्‍यावहारिक कहा जा सकता है.

कट ऑफ मार्क्‍स अधिक होगा

दो सौ पचास अंकों वाले इस पेपर में एक सौ बीस अंकों का संबंध इस तरह के केस स्‍टडी वाले प्रश्‍नों से था. कुल-मिलाकर यह कहना गलत नहीं होगा कि चूंकि प्रश्‍न-पत्र पिछले कुछ वर्षों की तुलना में परीक्षार्थियों के लिए अधिक अनुकूल था, इसलिए इस बार का कट-ऑफ मार्क्‍स पिछले वर्ष की तुलना में लगभग तीस-चालीस अंक अधिक होना चाहिए और ऐसा होना एक स्‍वागत योग्‍य बात होगी.

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