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केंद्रीय उपभोक्ता एंव खाद्य मंत्री का बड़ा बयान- सर्विस चार्ज की आड़ में कंज्यूमर से और लूट नहीं

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सर्विस चार्ज की आड़ में उपभोक्ता को लूटने के मामले में सरकार ने सख्ती दिखाई है. उपभोक्ता मंत्री रामविलास पासवानने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर इस संबंध में मीडिया को पूरी जानकारी दी है. उन्होंने कहा कि उपभोक्ता बिल को लेकर राष्ट्रपति की अनुशंसा भी हो गई है और ये अब एक्ट का रूप धारण कर चुका है. उपभोक्ता संरक्षण बिल (कंज्यूमर प्रोटेक्शन बिल 2019) में CCPA का गठन किया गया है. इसकी मदद से सभी कंज्यूमर कोर्ट और फोरम का नाम बदल कर कंज्यूमर कमीशन हो जाएगा. पहले कोर्ट या फोरम उसी केस को देखेगा जो उसके पास जाकर शिकायत करेगा. इसके अलावा CCPA के पास सो-मोटो (Suo moto) जारी करने का भी अधिकार होगा.

बिना खरीदे भी कर सकते हैं सामान की शिकायत 
पहले CCPA का प्रावधान नहीं था. CCPA उपभोक्ता को यह ताकत देता है कि अगर आपने समान नहीं खरीदा है या खरीदने से पहले भी आप शिकायत कर सकते हैं. मसलन आपको पता है कि फलां कार में कुछ गड़बड़ी है तो आप खरीदने से पहले भी उसकी शिकायत कर सकते हैं. इन्वेस्टिगेशन विंग भी होगा जिसमें CCPA के भी अधिकारी होंगे, साथ ही सभी सेक्टर के प्रतिनिधि होंगे.

हर समस्या का हल CCPA 
ज्यादातर उपभोक्ता के पास जानकारी का अभाव रहता है. उनको यह नहीं मालूम होता है कि कोई शिकायत कहां करे. इस समस्या को भी CCPA की मदद से दूर किया जाएगा. साथ ही न्यायिक प्रक्रिया को भी सरल बनाया जाएगा. पहले सामान जहां से खरीदते थे वहीं शिकायत करनी होती थी. अब उपभोक्ता कहीं से भी शिकायत कर सकते हैं. उन्हें इसके लिए वकील करने की भी जरूरत नहीं है.

लाखों केस लंबित हैं 
कंज्यूमर कोर्ट में लाखों केस लंबित हैं. मसलन डिस्ट्रिक्ट लेवल पर 3 लाख 50 हजार केस लंबित है. इसकी एक बड़ी वजह है कि कई पद खाली पड़े हैं. जो सदस्य या चेयरमैन हैं, उनसे लगातार आग्रह है कि खाली पदों को जल्द भर जाए. जज को नए बिल के तहत नहीं रखा गया है. उपभोक्ता नियमों का मकसद ग्राहकों को न्याय दिलाना है ना कि कोर्ट कचहरी के चक्कर लगवाना.

मीडिया को लेकर भी सख्त प्रावधान 
इसके अलावा इस कानून में मीडिया (प्रिंट/ इलेक्ट्रॉनिक) को लेकर भी कई प्रावधान किए गए हैं. मीडिया से कहा गया है कि जितना लिखित दिया गया है सिर्फ उतना ही प्रचारित करना है या दिखाना है. सेलिब्रिटी जो ब्रांड का प्रचार करते हैं, उनके लिए कहा गया है कि जितना लिखा दिया गया है सिर्फ उतना ही बोले. इसके अलग कुछ नहीं करना है. बता दें, सेलिब्रिटी के लिए जेल का प्रावधान नहीं है. मैन्युफैक्चरिंग डिफेक्ट पर आजीवन कारावास का भी प्रावधान है.

मैन्युफैक्चरिंग डेट लिखा होना जरूरी है 
हालांकि, सेलिब्रिटी जो ब्रांड का प्रचार करते हैं उनपर जुर्माना का प्रावधान है. सेलिब्रिटी के खिलाफ 10 लाख रुपये तक जुर्माना और 1 साल तक प्रचार करने पर रोक के भी प्रावधान शामिल किए गए हैं. केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान ने कहा कि ये सब कुछ अभी सिर्फ एक्ट में है, रूल जल्द बनेंगे. 3 महीने में सारे रूल बन कर तैयार हो जाएंगे. साथ ही CCPA के चेयरमैन का मामला भी जल्द निबट जाएगा. उपभोक्ता मामलों के मंत्री रामविलास पासवान ने कहा कि हर सामान पर मैन्युफैक्चरिंग डेट होना जरूरी है. एक्सपायरी डेट भी होना चाहिए. सामान की कीमत साफ-साफ लिखी होनी चाहिए.