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वर्धा यूनिवर्सिटी में धरना देने और पीएम को पत्र लिखने वाले छात्रों को निकाला…

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महाराष्ट्र के वर्धा में महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय में धरना आयोजित करने वाले और प्रधानमंत्री मोदी को चिट्ठी लिखने वाले छह छात्रों को निकाल दिया गया है.

ये छात्र मॉब लिंचिंग और रेप के आरोपी नेताओं को बचाने के ख़िलाफ़ धरना दे रहे थे.

9 अक्टूबर को कार्यवाहक रजिस्ट्रार ने इस संबंध में आदेश ज़ारी किया है. इसके मुताबिक छात्रों को धरना आयोजित करके 2019 के महाराष्ट्र विधानसभा चुनावों को लेकर लागू आचार संहिता के उल्लंघन और न्यायिक प्रक्रिया में दख़ल देने के चलते निकाला गया है.

छह छात्रों में से एक छात्र चंदन सरोज ने अख़बार से कहा है कि 9 अक्टूबर को हुए धरने में करीब 100 छात्र शामिल थे लेकिन ख़ास तौर पर तीन दलित और तीन ओबीसी छात्रों के ख़िलाफ़ कार्रवाई की गई है.

आरएसएस से जुड़े होने से इनकार

पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद ज़िले में एक स्कूल शिक्षक बंधु प्रकाश पाल, उनकी गर्भवती पत्नी और आठ साल के पुत्र की हत्या से जुड़ी ख़बर है.

इस मामले पर तब राजनीति तेज हो गई थी जब बीजेपी ने बंधु प्रकाश पाल को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का सदस्य बताते हुए तृणमूल कांग्रेस पर उनकी हत्या का आरोप लगाया था.

लेकिन, अब बंधु प्रकाश पाल के परिवार का कहना है कि उनका किसी राजनीतिक पार्टी और संगठन से कोई संबंध नहीं था.

बारला गांव में रहने वालीं उनकी मां माया पाल ने अख़बार से कहा है, ”वो एक कोरे कागज़ की तरह था. किसने कहा कि वो बीजेपी का सदस्य था. वो बीजेपी या तृणमूल कांग्रेस से कभी जुड़ा नहीं रहा. वो कभी आरएसएस के साथ नहीं था. ये झूठ फैलाया जा रहा है.”सीबीआई के पूर्व निदेशक आलोक वर्मा

आलोक वर्मा पर सीवीसी रिपोर्ट

केंद्रीय सतर्कता आयोग (सीवीसी) ने पिछले साल सीबीआई के पूर्व निदेशक आलोक कुमार वर्मा के तीन बड़े मामलों में जांच की थी.

इनमें मांस कारोबारी मोईन कुरैशी से जुड़े मामले को बढ़ावा देने के लिए सीबीआई अधिकारियों को रिश्वत देना, आईआरसीटीसी घोटाले में फआईआर से एक मुख्य संदिग्ध का नाम हटाना और दागदार अधिकारियों को एजेंसी में जोड़ने की कोशिश करने के मामले शामिल हैं.

सीवीसी की जांच के नतीजों अब तक सामने नहीं आई है, जिन्होंने आलोक वर्मा को सीबीआई से हटाने के फ़ैसले में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी.

जम्मू-कश्मीर में मिल सकती है फोन करने की छूट

जम्मू और कश्मीर प्रशासन चरणबद्ध तरीके से राज्य से मोबाइल और टेलिफोन पर लगा प्रतिबंध हटाने पर विचार कर रहा है. साथ ही पोस्टपेड कनेक्शन पर वॉयस कॉल्स को भी बहाल कर दिया जाएगा.

दो वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों ने नाम न बते की शर्त पर अख़बार को ये जानकारी दी है. शनिवार को होने वाली एक बैठक में इस पर चर्चा की जाएगी. इस बैठक में कुछ और राजनेताओं को छोड़ने का फैसले लिया जा सकता है.

जम्मू और कश्मीर में धारा 370 हटाए जाने के बाद से कई तरह के प्रतिबंध लगाए गए हैं और नेताओं को हिरासत में रखा गया है.