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अब ऐसे ही नहीं बेच सकते कंडोम, फेस मास्क और चश्मा; यह काम कराना हो गया अनिवार्य

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नई दिल्ली: अब कोई भी दुकानदार कंडोम और फेस मास्क ऐसे ही नहीं बेच सकता है. इसके लिए उसे रजिस्ट्रेशन की जरूरत होगी. दरअसल, चिकित्सा उपकरण नियमों में संशोधन की मानें तो थर्मामीटर, कंडोम, फेस मास्क, चश्मा या कोई अन्य चिकित्सा उपकरण (मेडिकल डिवाइस) बेचने वाले सभी स्टोर मालिकों को स्टेट लाइसेंसिंग अथॉरिटी में पंजीकरण कराना अनिवार्य होगा. इस नए नियम से मेडिकल डिवाइस का रिकॉर्ड रखने में आसानी होगी.

इंडियन एक्सप्रेस में छपी खबर के मुताबिक, नए मेडिकल डिवाइस नियमों के तहत लाइसेंस चाहने वालों को यह दिखाना होगा कि उनके पास उचित भंडारण के लिए पर्याप्त जगह है और उनके पास आवश्यक तापमान और प्रकाश की भी व्यवस्था है. मेडिकल स्टोर्स को न केवल दो साल की अवधि के लिए ग्राहकों, दवाओं के बैच या उपकरणों की संख्या का रिकॉर्ड मेंटेन करना होगा, बल्कि एक पंजीकृत निर्माता या आयातक से ही उपकरण खरीदना होगा. मेडिकल स्टोर्स को ‘सक्षम तकनीकी कर्मचारियों’ का डिटेल भी देना होगा. मेडिकल स्टोर्स को यह बताना होगा कि उसके पास एक पंजीकृत फार्मासिस्ट है या फिर उसका कर्मचारी ग्रेजुएट है और उसके पास मेडिकल डिवाइस बेचने का कम से कम एक साल का अनुभव है.

एसोसिएशन ऑफ इंडियन मेडिकल डिवाइस इंडस्ट्री (एआईएमईडी) के फोरम कॉर्डिनेटर राजीव नाथ ने कहा कि यह अच्छी बात है कि अधिसूचना में हमारी अधिकांश सिफारिशों को स्वीकार कर लिया गया है. यह अच्छा है कि अधिसूचना में कहा गया है कि जिन लोगों के पास चिकित्सा उपकरण बेचने का अनुभव है, वे ऐसा करना जारी रख सकते हैं. उन्होंने आगे कहा कि एक फुलप्रूफ रिकॉर्ड-कीपिंग पद्धति को तैयार करने की आवश्यकता हो सकती है.

उन्होंने कहा, ‘इस तरह मेडिकल डिवाइसों का रिकॉर्ड रखना निश्चित रूप से अच्छा है, मगर हम मास्क और कंडोम बेचने वाले एक किराने की दुकान के मालिक या पान वाले को इसका रिकॉर्ड रखने के लिए कैसे सुनिश्चित कर सकते हैं? बता दें कि यह पंजीकरण तब तक स्थायी रूप से वैध होगा, जब तक कि हर पांच साल में 3,000 रुपये की रिटेंशन फीस का भुगतान किया जाता रहेगा. या फिर तब तक जब तक कि राज्य लाइसेंसिंग प्राधिकरण द्वारा निलंबित या रद्द नहीं कर दिया जाता है.

सरकारी अधिसूचना में यह भी कहा गया है कि लाइसेंसिंग प्राधिकरण को 10 दिनों के भीतर आवेदन का निष्पादन करना होगा. अगर आवेदन खारिज कर दिया जाता है तो प्राधिकरण को लिखित रूप में कारण बताना होगा. अगर पंजीकरण प्रदान नहीं किया जाता है तो आवेदक आवेदन की अस्वीकृति के 45 दिनों के भीतर राज्य सरकार से संपर्क कर सकता है. हालांकि, मौजूदा मेडिकल स्टोर, स्टॉकिस्ट और थोक विक्रेताओं के लिए पंजीकरण आवश्यक नहीं है. बता दें कि देश में करीब 9.5 लाख दवा विक्रेता हैं.

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