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डॉ. भीमराव अंबेडकर लॉ यूनिवर्सिटी में प्रोफेसर व डिप्टी रजिस्ट्रार के पदों पर भर्ती प्रक्रिया रद्द, जानें वजह

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डॉ. भीमराव अंबेडकर लॉ यूनिवर्सिटी लॉ यूनिवर्सिटी में प्रोफ़ेसर व डिप्टी रजिस्ट्रार के पदों पर भर्ती प्रक्रिया रद्द कर दी गयी है. आज हुई बैठक में यह बड़ा बडा फैसला. बोम के 2 सदस्यों की सदस्यता खत्म करने के लिए यूनिवर्सिटी ने सरकार को पत्र लिखा है.

जयपुर.  यूपी के जयपुर स्थित डॉ. भीमराव अंबेडकर लॉ यूनिवर्सिटी लॉ यूनिवर्सिटी में प्रोफ़ेसर व डिप्टी रजिस्ट्रार के पदों पर भर्ती प्रक्रिया रद्द कर दी गयी है. आज हुई बोम की बैठक में यह बड़ा फैसला लिया गया है. बोम के 2 सदस्यों की सदस्यता खत्म करने के लिए यूनिवर्सिटी ने सरकार को पत्र लिखा है. दरअसल हाल ही में भर्तियों में अनियमितता की शिकायत मिली थी, जिसके बाद  राजभवन ने भी सभी भर्तियों पर रोक लगाते हुए जांच के आदेश दिये हैं.

मिली जानकारी के अनुसाए जयपुर डॉ. भीमराव अंबेडकर लॉ यूनिवर्सिटी में शनिवार को बोम की बैठक में प्रोफेसर और डिप्टी रजिस्ट्रार के पदों पर चल रही भर्ती प्रक्रिया को रद्द कर दिया गया. बोम के दो सदस्यों द्वारा इन पदों पर आवेदन करने और समय पर सूचना न देने के कारण यह फ़ैसला लिया गया है. बोम में राज्य सरकार के प्रतिनिधि डॉ. एस के सैनी ने प्रोफ़ेसर तथा डॉ. कर्ण सिंह यादव डिप्टी रजिस्ट्रार के पद पर आवेदन किया था.

इसके साथ ही बोम ने दोनों सदस्यों के आचरण को बोम सदस्य के रूप में अमर्यादित मानते हुए राज्य सरकार से उनकी सदस्य समाप्त करने की भी संस्तुति की है. कुलपति डॉ. देवस्वरूप ने बताया कि राज्य सरकार ने इसे गम्भीरता से लेते हुए यूनिवर्सिटी के बोम से इस पर उचित निर्णय लेते हुए आवश्यक कार्यवाही करने तथा कृत कार्यवाही से राज्य सरकार को अवगत कराने के लिए लिखा था. बोम ने माना कि चयन प्रक्रिया से संबंधित मामलों में लिए गए निर्णयों में सदस्यों की मौजूदगी से प्रक्रिया प्रभावित हुई है.

इसके साथ ही बोम ने दोनों सदस्यों के आचरण को बोम सदस्य के रूप में अमर्यादित मानते हुए राज्य सरकार से उनकी सदस्य समाप्त करने की भी संस्तुति की है. कुलपति डॉ. देवस्वरूप ने बताया कि राज्य सरकार ने इसे गम्भीरता से लेते हुए यूनिवर्सिटी के बोम से इस पर उचित निर्णय लेते हुए आवश्यक कार्यवाही करने तथा कृत कार्यवाही से राज्य सरकार को अवगत कराने के लिए लिखा था. बोम ने माना कि चयन प्रक्रिया से संबंधित मामलों में लिए गए निर्णयों में सदस्यों की मौजूदगी से प्रक्रिया प्रभावित हुई है.