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वैदिक मंत्रोच्चार के साथ विराजे भगवान राम जानकीकुलीपोटा श्रीराम धाम में की गई प्राण प्रतिष्ठानिकली भव्य निशान व शोभायात्रा

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जाँजगीर चाँपा : सिद्ध दक्षिणमुखी हनुमान मंदिर श्री राम धाम ग्राम कुलीपोटा में श्री राम जानकी प्राण प्रतिष्ठा अनुष्ठान व महोत्सव राम नवमी 17अप्रैल को वैदिक मंत्रोच्चार के साथ प्रातः 10:35 बजे से से 11.55 बजे तक किया गया ।सैकडो भक्त इस पवित्र अनुष्ठान के साक्षी बने । जिसने भी विग्रह के मनोहारी स्वरुप को देखा देखते रह गया ।दोपहर 1 से 4 बजे तक पूर्णाहुति , महा आरती , प्रसाद , ब्राह्मण भोज , भंडारा व भजन कार्यक्रम किया गया । प्रतिदिन भजन व सत्संग शाम सात से रात्रि नौ बजे तक किया गया ।
इससे पूर्व 16 अप्रैल को कलश शिखर स्थापना नगर भ्रमण व शोभायात्रा निकाली गई l राम पताका , डीजे, कर्मा, के साथ श्री राम जानकी की प्रतिमा के साथ भक्तों ने नगर भ्रमण किया । यहाँ से विभिन्न वाहनों से सभी भक्त शोभायात्री कुलीपोटा मंदिर स्थल तक रवाना की गई ।शाम पाँच बजे से शोभायात्रा श्री राम मंदिर नैला से भव्य शोभायात्रा व निशान यात्रा निकाली गई ।पहले बारिश की फुहारों फिर इत्र से स्वागत किया गया । बाजे गाजे , कर्मा दल , डीजे के साथ नगर भ्रमण कर भक्त गण जाँजगीर कचहरी चौक तक पहुँचे ।
जगह जगह हुआ स्वागत
इस दौरान जगह जगह पर भक्तों के लिए जलपान, शरबत ,ठंडा पानी ,फल की व्यवस्था की गई । भव्य स्वागत किया गया ।
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जयपुर में बना है मनोहारी विग्रह बैठे स्वरूप में विराजे प्रभु राम व माता जानकी *
हनुमान मंदिर कुलीपोटा (जांजगीर चांपा ) में श्रीरामधाम को कोलकाता व महाराष्ट्र सहित स्थानीय कारीगरो द्वारा मंदिर में नक़्क़ाशी कर अंतिम रूप दिया है । भगवान श्री राम एवं माता जानकी के मनोहारी अनुपम विग्रह को जयपुर के मूर्तिकारों ने गढ़ा है जो अपने भक्त वत्सल स्वरूप में यहाँ बैठे स्वरूप में विराजित हुए
अयोध्या में बालस्वरूप तो ननिहाल में श्री राम धाम
जाँजगीर – चाँपा मुख्य मार्ग में खोख़सा रेलवे ओवरब्रिज से एक किमी की दूरी में ग्राम कुलीपोटा में यह श्री राम धाम विराजित हैं । भगवान श्री राम की अवतरण भूमि अयोध्या धाम में एक ओर जहां प्रभु श्री रामलला एक बारह वर्षीय बालक के स्वरूप में विराजमान हैं । वहीं अपने ननिहाल छत्तीसगढ़ (दक्षिण कोशल) एवम् वनगमन कर अपनी चरण धूलि से पावन करने वाले इस भू भाग के जांजगीर चाँपा ज़िले के कुलीपोटा ग्राम में वे माता जानकी के साथ आज राम नवमी पर विराजमान हुए।
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37 वर्ष पहले निर्मित हुआ मंदिर अब श्रीराम धाम का लिया भव्य स्वरुप
सेवादार खेमुका परिवार के विष्णु खेमुका ने बताया कि मंदिर की स्थापना 37 वर्ष पूर्व की गई है इसके संस्थापक ब्रह्मलीन भगवती प्रसाद उनकी सहधर्मिणी श्रीमती पिस्ता देवी खेमुका की प्रेरणा से श्री राम धाम के सेवादार खेमुका परिवार व समस्त क्षेत्रवासी इस अनुष्ठान को पूर्ण कर रहे हैं । ब्रह्मलींन श्री एकरसानंद सरस्वती जी महाराज का आशीर्वाद इस पुण्य कार्य में बरस रहा है। गुरुदेव श्री गोस्वामी गोविंद बाबा जी, स्वामी श्री यदुनंदन जी महाराज , आचार्य श्री पवन कृष्ण जी महाराज , गुरुदेव श्री नित्यानंद जी महाराज के सानिध्य में श्री
श्री राम जानकी प्रतिमा का प्राण प्रतिष्ठा अनुष्ठान महोत्सव के समस्त आयोजन वृंदावन के आचार्यों की देख रेख में हो रहे हैं । 12 अप्रैल गुरुवार से कलश यात्रा के साथ अनुष्ठान प्रारंभ हुआ इसके बाद वेदीपूजन एवम् जलाधिवास किया गया । 13अप्रैल को धान्याधिवास, 14 अप्रैल को पुष्पाधिवास एवं फलाधिवास, 15 अप्रैल को घृताधिवास 16 अग्निधिवास के अनुष्ठान हुए । वृंदावन के आचार्यों द्वारा समस्त धार्मिक अनुष्ठान 12 अप्रैल से कराये गये ।
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श्री राम नाम हरि संकीर्तन प्रारंभ
प्रति वर्ष की भाँति मंदिर परिसर में अखंड श्री राम नाम हरि संकीर्तन सप्ताह इस वर्ष 18अप्रैल से शुरू किया गया । 23 अप्रैल मंगलवार को श्री हनुमान जन्मोत्सव , 25 अप्रैल को कीर्तन समापन व हवन तथा 26 अप्रैल को सहस्र धारा से समापन होगा ।