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क्यों स्वास्थ्य के लिए उपवास अच्छा है? प्राचीन विज्ञान के पास इसका सटीक जवाब है

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क्या आप भी पहले चीट डाइट करते हैं फिर वजन कम करने के लिए क्रैश डाइटिंग करते हैं? क्या दिन के अंत तक कठिन और थकाऊ व्यायाम से आप थका हुआ महसूस करते हैं? फिर आधुनिक युग में मोटापा और बीमारी की वजहों का उत्तर वो नहीं जिनकी आप तलाश कर रहे हैं.

हमारे पूर्वजों ने वेदों के विज्ञान को मजबूत किया. प्राकृतिक प्रक्रियाओं के माध्यम से शरीर को ठीक करने के उनके अपने तरीके थे. 2000 साल पहले आयुर्वेद की शुरुआत करने वाले ऋषियों ने बीमारियों का मूल कारण पाचन तंत्र में विषाक्त पदार्थों का होना माना था. आयुर्वेद में कहा जाता है कि इन विषैले पदार्थों को शरीर से निकालने से शरीर भी स्वस्थ्य और मस्तिष्क एक्टिव रहता है.

उपवास क्या है ?

प्राचीन संस्कृति के अनुसार उपवास वह तकनीक जिसमें हमें खाने को कुछ समय के लिए सीमित कर देते हैं. संस्कृत शब्द ‘प्रत्याहारा’ (प्रति+आहार – भोजन से संयम) और उपवास (निकट + रहना – सर्वशक्तिमान के साथ निकटता) का प्रयोग उपवास की तकनीक को समझाने के लिए किया जाता था. पूरी तरह से उपवास आंतों की सफाई में मदद करता है, और आंशिक उपवास विभिन्न प्रकार के सूक्ष्म पोषक तत्वों को विभिन्न प्रकार के खाद्य स्रोतों से हमारे शरीर में प्राप्त करने में मदद
करता है.

यह साबित हो चुका है कि कैलोरी को कम करने के दीर्घकालिक लाभ साबित होते हैं. जैसे यह कैंसर की कम संभावना, हृदय रोग, मधुमेह और उम्र बढ़ने की प्रक्रिया को धीमा करता है. आराम और आहार में परिवर्तन शरीर के लिए अच्छा होता है. इसमें नियमित रूप से नींद चक्र भी शामिल है.

आयुर्वेद क्या कहता है?

प्राचीन भारतीय, प्रकृति के साथ तालमेल से रहने में विश्वास करते थेआयुर्वेद बदलते मौसम के साथ हमारे आहार को मिश्रित करने और वर्ष में कम से कम एक बार डिटॉक्सिफॉई करने की वकालत करता है. हमें मौसमी और स्थानीय भोजन हमेशा करना चाहिए. प्राचीन विज्ञान ने शरीर के दोषों को भी खोजा है – वातपित्त और कफ ये तीन दोष हैं जो पांच मूलभूत तत्वों से जुड़े हैंऔर ये ऋतुओं में परिवर्तन के साथ होते हैंउपवास शरीर को इन बदलावों के साथ ढलने में मदद करता है. आयुर्वेद यह भी मानता है कि चंद्रमा का गुरुत्वाकर्षण बल हमारे शरीर में प्रमुख तरल पदार्थों को प्रभावित करता है जो भावनात्मक असंतुलन का कारण बनता है. उपवास प्राकृतिक एंटीडोट का काम करता है जो शरीर में एसिड को कम करता है और साथ ही मानसिक और भावनात्मक शांति भी लाता है.

कैसे करें उपवास

जंक फूड और बाकी भोजन को अधिक खाने से हमारा पाचन तंत्र थक गया है और यह विषाक्त पदार्थों से भरा हुआ है. भोजन से चीनी, प्रोसेस्ड फूड, कैफिन और शराब को कम से कम एक दिन के लिए कम करना एक अच्छी शुरुआत हो सकती है. आयुर्वेद नियमित रूप से और छोटे उपवास को अच्छा मानता है. जैसे सप्ताह में एक बार, महीने में एक बार या मौसम के बदलाव के साथ एक बाद उपवास अच्छा होता है. कठोर पूरी तरह उपवास पर जाने की जगह व्यक्ति सरल, आसानी से पचने वाले खाद्य पदार्थों जैसे फलों और सब्जियों, जूस, या साधारण खिचड़ी का सहारा ले सकता है. यह पाचन तंत्र को पोषण और ऊर्जा देते हुए डिटॉक्सीफाई करने की अनुमति देता है.

खास बातें जो रखें याद –

उपवास से आपको कमजोर और बहुत अधिक भूखा महसूस नहीं करना चाहिए.

त्रिफला जैसे हर्बल संयोजन कोमल डिटॉक्सिफायर हैं जो पाचन तंत्र के लिए अच्छे हैं.

उपवास के साथ मेडिटेशन करने से उपवास के फायदे और भी अधिक बढ़ सकते हैं.

उपवास को तोड़ते समय चीट डाइट ना करें. आरामदायक और आसानी से पचने वाले भोजन को महत्व दें.

कैसे यह करता है मदद?

अध्ययनों से पता चलता है कि उपवास द्वारा पाचन तंत्र को आराम देने से चिकित्सा के लिए इस्तेमाल होने वाली ऊर्जा को मुक्त किया जाता है. यह शरीर में संचित विषाक्त पदार्थों को दूर करते हुए इम्यूनिटी को बढ़ता है. इससे शरीर हल्का लगता है और नैचुरल ग्लो भी आता है. साफ और आराम किए शरीर से दिमाग अलर्ट रहता है जिससे हम आसानी से प्राथमिकताएं चुनते हैं.

हमारे पूर्वजों ने उपवास के जरिए अच्छे स्वास्थ्य का संदेश दिया जिसे अक्सर धार्मिक परंपराओं को माध्यम के रूप में इस्तेमाल किया गया. हम अब जानते हैं कि यह परंपरा वैज्ञानिक रूप से सिद्ध तरीकों से आए हैं. क्या आपको नहीं लगता कि यह अपनी जड़ों को अपनाने का समय है?