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मध्य प्रदेश: इस मंदिर के सामने आते ही ट्रेन हो जाती है धीमी, देती है मंदिर को सलामी

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 क्या आप सोच भी सकते हैं कि कोई ट्रेन किसी मंदिर के सामने से गुजरते वक़्त खुद ब खुद रुक जाए या उसकी गति सामान्य से बहुत कम हो जाए। अलग-अलग धार्मिक मान्यताओं के हमारे देश मे किवंदितियों, किस्सों और कहानी का अपना एक मुकाम है और इसी कड़ी में आज हम आपको बता रहे हैं मध्य प्रदेश के एक ऐसे ही मंदिर के बारे में जहां से गुजरने वाली हर एक तेज रफ्तार ट्रेन लगभग रुक सी जाती है।

यहां तेज रफ्तार ट्रेनों का गुजरना आम है। यहां से गुजरने वाली हर एक ट्रेन इस मंदिर को सलामी देती है। अपनी गति और ताकत को भूलकर यहां से गुजरने वाली ट्रेन इस हनुमान मंदिर के सामने अपनी चाल को धीमा कर लेती है, क्या वाकई ये सच है या फिर कोरा भ्रम? तो आइए जानते हैं क्या है इस मंदिर की सच्चाई.

बोलाई स्टेशन से रोजाना दर्जनों ट्रेन गुजरती हैं। ये किसी भी रेलवे स्टेशन के लिए सामान्य बात है। लेकिन ट्रेन कि ये पटरियां जब करीब एक किलोमीटर आगे की तरफ पहुंचते हैं तो यहां कुछ ऐसा देखने को मिलता है जिस पर एक दम यक़ीन नहीं होता। ये खेड़ापति हनुमान मंदिर, हनुमान जी की प्रतिमा में आकर्षण और तेज लोगों की आस्था को जोड़ता है और साथ ही जोड़ता है इस मंदिर के सामने से गुजरने वाली हर एक ट्रेन को।

गांव के बुजुर्ग बताते हैं कि मंदिर का इतिहास परमार काल का है। किसी को नहीं मालूम कि यह कितना प्राचीन है। मगर ट्रेन के यहां रुकने और गति कम होने की जो कहानी है वो बेहद रोचक है। साल 1967 में कोई संत इस मंदिर पर रुके और धुनि लगाने के लिये यहां से गुजरने वाली ट्रेन से कोयला मांगा तो ड्राइवर ने कोयला नहीं दिया। नतीजा यह हुआ कि ट्रेन इस जगह से आगे नहीं बढ़ पाई। ड्राइवर को अपने किये पर पछतावा हुआ और हनुमान मंदिर में लगने वाली धुनि के लिए कोयला समर्पित किया, तब जा कर ट्रेन आगे बढ़ पाई। उसी वक्त से यहां से गुजरने वाली हर ट्रेन की गति इस मंदिर के पास आते ही कम हो जाती है या रुक जाती है।

ग्रामीण और पूर्व विधायक दिप सिंह यादव बताते हैं 25 साल पहले कोयले की ट्रेन चलती थी। हर एक ड्राइवर कोयला डाल कर जाता था। एक ड्राइवर ने कोयले नहीं डाला तो ट्रेन वहां जा कर खड़ी हो गई और स्टार्ट ही नहीं हुई। फिर ड्राइवर वापस यहां आया और गलती की माफी मांगी, उसके बाद गाड़ी यहां से चली। वे बताते हैं कि जो भी ट्रेन अगर यहां अपनी गति कम नहीं करती है तो वो काल का शिकार हो जाती है।

मान्यता है कि इस मंदिर के सामने से निकलने वाली रेलों में सवार यात्रियों को हनुमान प्रतिमा के दर्शन हो सके इसलिए रात में भी इसको बंद नहीं किया जाता, चारों तरफ से इसे खुला रखा जाता है, जबकि अन्य मंदिरों में रात में कपाट बंद कर दिए जाते हैं।

बोलाई स्टेशन से थोड़ी दूर पर स्थापित इस मंदिर के पुजारी नारायण प्रसाद ने यहां की मान्यताओं के बारे में विस्तार से बताया। पुजारी बताते हैं कि यहां झूठ, छल-कपट कुछ नहीं चलता। जो भी आत्मा से मांगो भगवान पूरा करते हैं। 60 के दशक में संत आये थे, तब यह वीरान जंगल था और एक चबूतरा था, जो भी श्रद्धालु आते वो भगवान से मांगते हैं। ट्रेन के गार्ड, ड्राइवर और स्टाफ बाबा को नमस्कार करते हैं, तो गाड़ी स्लो हो जाती है।